Tuesday, November 12, 2019
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बजट 2018 का स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) टेस्ट

एक फरवरी 2018 को जब जेटली जी का बजट आया, पत्रकारों से लेकर पकौड़ेवालों तक ने उसका एनालिसिस करना शुरू कर दिया । कई एक्सपर्ट्स ने यह निष्कर्ष निकाला की इस बजट में कुछ नया नहीं है । कुछ एंकर न्यूज़रूम में ताल ठोककर कहते रहे की यह सिर्फ “गरीबों” का बजट है, और गरीबों के लिए है। मध्यम वर्ग हर बार की तरह इनकम टैक्स की छूट की सीमा बढ़ाये जाने की आस में भाषण सुनता रहा। पर यह सीमा है, जो कदम ही नहीं बढाती । ऊपर से शेयर एवं म्यूच्यूअल फण्ड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) लगने से बहुतों को रुलाई आ गयी। शेयर मार्किट तो इस सदमे को बर्दाश्त ही न कर सका और धड़ाम से ज़मीन पर आ गिरा। मैं भी, अपने ही मध्यम वर्ग के भाइयों और बहनो की तरह ज़बरदस्ती न्यूज़ अपडेट्स देखता रहा। शाम को ऑफिस से निकलने से थोड़ी देर पहले मेरी नज़र एक खबर पर पड़ी “बजट – 2018 में सरकार ने दिया स्टैण्डर्ड डिडक्शन का फायदा”, जैसे ही मेरी नज़र शब्द “स्टैण्डर्ड डिडक्शन” पर गयी, मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी, फरवरी के महीने में माथे से पसीना टपकने लगा। कान सुर्ख हो गए और धीरे-धीरे नब्बे के दशक की फिल्मों की रेगुलर माओं की तरह मैं भी फ़्लैश बैक में चला गया ।

मैंने देखा, मैं सीबीएसई (CBSE) की १०वी बोर्ड की परीक्षा हाल मैं बैठा हूँ । परीक्षा गणित की है, बाक़ी बच्चे शांति से अपना पेपर साल्व कर रहें हैं । पर मैं बैठा हूँ और प्रश्नपत्रिका को एकटक देख रहा हूँ, ठीक उसी तरह जैसे एग्जाम सेंटर आते वक़्त पिताजी के बजाज स्कूटर के पीछे बैठकर अक्षय कुमार और रवीना टंडन की फिल्म का पोस्टर देख रहा था । मैं परीक्षा हाल मैं बैठा सोच रहा था की काश मेरी आँखों मैं कोई दूरबीन लगी होती जिसकी मदद से मैं अपने आगे बैठे लड़के की कॉपी देख पाता । कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था क्या करूँ ।

थक हार कर कुछ सवालों को हल करना शुरू किया । रैशनल नंबर (Rational Number) का सवाल बनाना शुरू किया तो यह सोचने लगा की अगर मैं फ़ैल (फेल) हुआ तो पिताजी मेरी पिटाई कितने इर्रेशनल (Irrational) तरीके से करेंगे । तभी एक मित्र (जो आजकल दिल्ली के भजनपुरा में क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने का काम करते हैं ) की बात याद आयी, उसने मुझे कहा था, यदि आप गणित के एग्जाम में सिर्फ फार्मूला और स्टेप्स लिख देते हो – भले ही आपका जवाब गलत हो, सीबीएसई वाले दया भावना से आपको पास कर देते हैं ।

मैंने जैसे तैसे कुछ प्रशनो को हल किया और सोचा की यदि सीबीएसई ने मुझे दया भावना से हर सवाल के एक अंक भी दिए तो टोटल अंक होंगे तीस । पास होने के लिए अब ज़रुररत थी सिर्फ तीन अंकों की, पांच अंक का आखरी प्रशन taxation से जुड़ा था, जिसमे उल्लेख था, उस शब्द का जिसने मेरी ज़िन्दगी बदल दी – स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction ) सही जवाब की परवाह किये बिना मैंने उस प्रशन को तुरंत हल किया, और यह मान बैठा – अब तो मैं पास!

रिजल्ट का वक़्त क़रीब था। रिजल्ट से पहले मैं अपने छेत्र के सभी मंदिर, दरगाह, गुरूद्वारे और चर्च होकर आ गया था। मैं सोते-जागते सिर्फ यही प्रार्थना कर रहा था की मेरी कॉपी जांचने वाले एग्जामिनर का पेट खुलासे से साफ़ हुआ हो और अपनी पत्नी से लड़ कर न आया हो ताकि वो मेरी कॉपी जाचें बिना ही मुझे 33 अंक बैठा दे। अंततः जब रिजल्ट लगा, मैंने अपने नाम के आगे फेल लिखा देखा, विषय गणित और अंक थे तीस । मैं तीन अंक से फेल हो गया था। मुझे मालूम नहीं सीबीएसई ने मुझे तीस अंक दान में दिए या मेरे जवाब सही थे पर उस दिन मुझे स्टैण्डर्ड डिडक्शन से नफरत हो गयी। मुझे मालूम है, उस दिन के बाद से मेरा स्टैण्डर्ड जो गिरना शुरू हुआ, सो आज तक गिरता ही चला जा रहा है ।

फ़्लैश बैक में खोया ही था की फ़ोन की घंटी बजी, पत्नीजी का फ़ोन था । फ़ोन उठाया तो गुस्से में बोली, आप भी न जी “काम वाली बाई” के पैसे देकर नहीं गए, मुझे बोलना पड़ा पैसे नहीं हैं । अपना छोड़ो कम से कम मेरा तो स्टैण्डर्ड डिडक्ट मत करवाओ । यह कहकर फ़ोन काट दिया । यह सुनकर मैं अपनी डिडक्टेड दुनिया मैं वापिस आ गया ।

बजट से जुडी ख़बरों को दोबारा पढ़ने लगा तो पता चला की अब सैलरी वालों को अपनी कमाई पर 40,000 के स्टैण्डर्ड डिडक्शन का तोहफा मिलेगा । मतलब आपकी ग्रॉस सैलरी से 40 हाज़ार की रकम घटा कर टैक्स का आंकलन किया जायेगा । पर दूसरी तरफ अब सैलरी पाने वाले लोग ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रिइम्बरस्मेंट पर टैक्स छूट नहीं ले पाएंगे । इससे पहले Rs. 15000 (मेडिकल रिइम्बरस्मेंट ) और Rs. 19200 (ट्रांसपोर्ट अलाउंस) की छूट मिलती थी । यदि हम आंकलन करें तो पायंगे की टोटल छूट सिर्फ {40,000 – (19200 + 15000 ) = Rs. 5800 की होगी और ये भी व्यक्ति के टैक्स स्लैब पर निर्भर होगी। तो अगर कोई व्यक्ति 5 % टैक्स दे रहा है उसके लिए Rs 290 की बचत, 20 % वालों के लिए Rs. 1160 की बचत और 30 % वालों के लिए Rs 1740 की बचत होगी । पर यदि आप 5 लाख से अधिक आमदनी वाले व्यक्ति हैं, तो बढे हुए सेस (4 %) के कारण ये चुल्लू भर छूट भी आपको नहीं मिलेगी ।

यह जानकर की कोई फायदा नहीं होगा, मैंने सोचा की अगर चार पकोड़े देकर, पौने चार पकोड़े वापिस लेने ही थे, तो आखिर क्यों लेकर आये दोबारा, ये मुआ – Standard Deduction!